मधुमक्खी पालन व्यवसाय- "जानिए सिक्के का दूसरा पहेलु।"

इंडिजिनस हनी की एपियरी साइट पर मधुमक्खि पालन की गतिविधि

गुजरातमें बहुत सारे लोग शहद के व्यवसाय से ज्यादा मधुमक्खी के व्यवसाय में अधिक दिलचस्पी ले रहे है।”

में २०१२ से मधुमक्खी पालनका कार्य कर रहा हु, इतने सालो मेंने बहुत कुछ देखा है। जो मधुमक्खी पालन के काम में जुड़ने वाले हर नए व्यक्ति के लिए जानना जरुरी है।

वर्तमान समय में हमारे देश में लाखो नव युवान और किशानो की आशाभरी नज़र मधुमक्खी पालन के व्यवसाय की तरफ है। जिसमे माननीय प्रधानमंत्री मोदीजी के “स्वीट रिवोल्यूशन” बड़ा योगदान है। मधुमक्खी पालन वर्त्तमान समय की जरूरत है क्युकी इसमें लोगो की स्वास्थ्य सम्बन्धी, रोजगार सम्बन्धी और खेतो में परागण सम्बन्धी काफी समस्याओ का समाधान छुपा हुआ है।

परन्तु जैसे हर सिक्का दो तरफ़ा होता है उसी तरह यहा भी नकारात्मक पहलू विकसित हो रहा है।

गुजरातमें बहुत सारे लोग शहद के व्यवसाय से ज्यादा मधुमक्खी के व्यवसाय में अधिक दिलचस्पी ले रहे है।” जिनका भोग उत्साही नव युवान और भोले किशान बन रहे है। बहुत से लोग प्रलोभनित और तर्कहीन बाते बोल कर केवल मधुमक्खी बेचने का काम कर रहे है, जिन्होंने कभी व्यावसायिक रूप से मधु का उत्पादन भी नहीं किया हैं। या सिर्फ मधुमक्खी की दलाली का कम करते है।

लोग मधुमक्खी पालन और पशुपालन समान नजर से देख रहे हैं लेकिन वास्तविकता बहुत ही अलग है। व्यावसायिक रूप से शहद का उत्पादन एक ही जगह पर स्थिर रह के करना संभव नहीं है। क्युकी एकही जगह में ३६५ दिन भारी मात्रा में फुल मिलाना लगभग नामुनकिन है।

मानलीजिये हमारे पास १०० मधुमक्खी की कोलोनी/ मधुमक्खी के बक्से है, तो इनके लिए १०० एकर जमीन पर फुल होने चाहिए। अगर यह संभव हो तभी हमें कुछ फायदे रूप आय मिलेगी। इसी कारण एक मधुमक्खीपालक हर सीज़न के अनुसार अपने मधुमक्खी के बक्सों की जगह बदलता रहता है।

गुजरातमें लाई, अजवाईन, सोफ़ (वरयाली), धनिया, अरहर, तिल, अल्फाल्फा, बबुल और नारयल जैसे पाक मधुमक्खी के लिए उपयोगी है।

गेहू, कपास, मूंगफली, ज्वार, धान, आदि जैसे पाक मधुमक्खी के लिए उपयोगी नहीं है, इस बात को अवश्य ध्यान रखे।

गुजरात और उत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति बहुत भिन्न है। गुजरात में शहद के उत्पादन में बहुत कम होता है, जिसके कारण ज्यादा तापमान, हरे रंगकी चिडया की ज्यादा मात्रा एवं खेतो में ज्यादा जंतुनाशक का प्रयोग है।

इसीलिए में यह सलाह देता हु की, कोईभी व्यक्ति मार्केट खुद मुआइना करके मधुमक्खी पालन के कार्य में प्रवेश करे।

मधुमक्खियों की बिक्री करने वाले लोग, अधिकतर अतिरंजितबाते करते है, कोईभी प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने और लॉन लेने से पूर्व इस कारोबार सही तरीके से जानना आवश्यक है।

में यह सलाह करता हु की कम निवेश के साथ छोटे पैमाने पर मधुमक्खी पालन की शरुआत करे और धीरे धीरे अनुभव के साथ ज्यदा निवेश करके आगे बढे।

अनार, आम जैसे बागायती पाको में परागण के लिए मधुमक्खी के बक्से रखने से पहले उपयोग किये जानेवाली जंतुनाशक का अभ्यास अवश्य करे। क्युकी मधुमक्खी बहुत शोम्य कीटक (डंख होने के बावजूद ... !!) है, वह जंतुनाशक के सामने टिक नहीं पाती। मधुमक्खी पालन में विफल बागवानी किसानों की सूची बहुत बड़ी है।

मेरी व्यक्तिगत राय यह है कि यदि आपको मधुमक्खी के प्रति लगाव है, तभी इस क्षेत्र में आगे बढे, क्योंकि केवल आर्थिक पहलू पर विचार करने वालो को, मधुमक्खिया जल्दी काट लेती है।