परिचय

मधुमक्खियों का सवर्धन करके संपूर्ण अहिंसक तरीके से शुद्ध और सात्विक शहद प्राप्त करने के उदेश्य के साथ डॉ.धर्मेश वाढेर ने सन २०१२ में मधुमक्खीपालन की शुरुआत की थी। बहुत कम लोग यह जानते हे की मधुमक्खीपालन करना शोषणकी नहीं परन्तु पोषणकी प्रवृति हे, परोपजिवन के सिद्धांत पर आधारित नहीं परन्तु सहजीवन के सिद्धांत पर आधारित हे। इसका मतलब है कि केवल इंसान के लिये नहीं, बल्कि दोनों इंसान और मधुमक्खियों के लिए फायदेमंद हे। वास्तव में मधुमक्खीपालन किसान, कृषि और प्रकृति सभी के लिए फायदेमंद है।

केवल शोख़ से कुदरत के सानिध्य में हुई छोटी सी शुरआत आज एक मधुमक्खीपालन व्यवसाय में परिवर्तित हो गयी हे। आज इंडिजिनस हनी के पास 1000 से भी अधिक मधुमक्खी की कोलोनी है। हमारा और हमारी मधुमक्खी का कार्यक्षेत्र गिरसोमनाथ जिले के ग्रामीण क्षेत्र हे।

वेरावल, गिर-सोमनाथ, गुजरात, भारत में मधुमक्खी पालक मधुमक्खी के छते के साथ

मधुमक्खी की एक कोलोनी में एक रानी मधुमक्खी, 200-300 नर मधुमक्खिया और २०००० से ८०००० कामदार मधुमक्खिया होती है। मधुमक्खियों के इस परिवार को लकड़ी के बक्सों में वैज्ञानिक रूप से रखा जाता हैं। यह बक्से पुरे साल फूलो से भरे विस्तार में रखे जाते है। पुरे साल फुल मिलने की वजह से मधुमक्खिया आवश्यकता से अधिक शहद बनाती हे। अतिरिक्त शहद आधुनिक मशीन की मदद से निकाल लिया जाता है। शहद निकालनी की इस प्रक्रिया के दौरान एक भी मधुमक्खि, अंडे और बच्चों को नुकसान नहीं होता है। इस शहद पर किसी भी प्रकार की प्रकिया नहीं की जाती और नाही कुछ(चीनी,प्रिज़र्वेटिव) मिलाया जाता हे। इस शहद को सिर्फ कपड़े के माध्यम से फ़िल्टर्ड किया जाता है।

इंडिजिनस हनी आप को 100% शुद्ध,सात्विक और प्राकृतिक शहद की पुष्टि देता है।