मधुमक्खीओ का पुर्थ्वी पर से नाश हो गया तो क्या होगा ?

"अगर पृथ्वी से मधुमक्खी का नाश हो जाये तो सिर्फ चार साल मे ही सारी जीवसृस्टि खत्म हो जायेगी। " - आलबर्ट आइन्स्टाइन

महान वैज्ञानिक की कही हुई ये बात हास्यास्पद ओर बड़ा प्रश्नार्थचिन्ह उत्पन करने वाली लगती है लेकिन आज धीरे धीरे लोग इन बातो का असर देखने लगे है।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्वभरमे कृषि मे रसायनिक खाद, जनिन परिवर्तित आहार (ओर विषैले जंतुनाशको का जम के उपयोग हुआ। शुरू शुरू मे इन चीज़ों का उपयोग थोड़ा फायदेमंद साबित हुआ लेकिन धीरे धीरे परिस्थिति ज्यादा विकट बनती गई, रासायनिक खादो के प्रयोग से गुणवत्तायुक्त उपजाव जमीने बंजर हो चुकी ओर जन्तुनाशको के प्रयोग से हजारो उपयोगी किटो का नाश हुआ, करोड़ो सालो से चली आ रही आहार शृंखला टूट गई।

मल्टी नेसनल कंपनिओ के जासे मे आकर रसायनों ओर जंतु नाशको के पीछे अरबो का खर्चा करने के बावजूद भी विश्वभरमे कृषि उत्पाद घटता चला जा रहा है। इनका दुष्प्रभाव सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नही है, मानव स्वास्थय पर भी गहरा असर हो रहा है डायबिटीज़, केंसर, आर. ए जेसी कही ओटो इम्यून बीमारी का कारण भी आहार मे हुआ बदलाव ही है।

छोटी सी दिखने वाली मधुमक्खीका का हमारी आहार शृंखला मे बहुत ही बड़ा योगदान है। आहार की शोध मे मधुमक्खियां एक फूल से दूसरे फूल उड़ती रहती है इनदौरान एक फूल से दूसरे फूल पर परग का वहन हो जाता है ओर फूलो पर फल लगते है। ८०% से ज्यादा पौधो मे फुलसे फलका निर्माण मधुमक्खियां ही करती है। जंतुनाशको के उपयोग से मधुमक्खी जेसे कई उपयोगी किटो का हमने नाश कर दिया।

जिससे पौधा हरभरा ओर स्वस्थ होने के बावजूद भी ठीक से परागण नही हो पाता ओर ठीक से फल या बीज नही लगते। अगर पोलिनेटर नही बचा तो बीज या फल भी नही बनेगे ओर पूरी आहार शृंखला टूट जायेगी। इसलिए जंतुनाशक दवाई का प्रयोग कर हम अपने ही पैरो पर कुल्हाड़ी मार रहे है।

भारत को छोड़ कर हर कही पेस्टिसाइड्स के उपयोग पर सरकार का नियंत्रण होता है। पेस्टिसाइड्स के उपयोग को लेकर हमारे देश मे किसी भी प्रकार का मानक निश्चित नही किया गया है इसलिए फसलों मे मन मर्जी विष का प्रयोग किया जाता है। विकसित राष्ट्रों मे कई बड़े आंदोलन हुए ओर सरकार को लोगो की सुननी पड़ी।

विश्वभर मे जिन जानलेवा ओर बहुत हनिकर्ता पेस्टिसाइड्स पर सालो से बैंड लगा हुआ है उन पेस्टिसाइड्स बेचनेवाली कंपनीओ को भारत सरकार ने लायसन्स दे रखा है क्योकि यहा पर कोई कुछ बोलनेवाला नही है। सरकार को करोड़ो रुपए का टेक्ष देने वाली कंपनी का विरोध सरकार क्यों करेगी ?शरुआत हमे ही करनी होगी।

गीर सोमनाथ, गुजरात के हम कुछ मित्र ने इनके विरोध मे मूवमेंट चला रहे है। समग्र प्राणीसृष्टी, जिवसृष्टी ओर पर्यावरण के हित ( वास्तव मे मानवहित) मे चल रही इस मूवमेंट से जुड़े।

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