रानी मधुमक्खी

रानी मधुमक्खीकी आश्चर्य उत्पन करनेवाली विशेषताए।

एक छत्ते मे हजारो मक्खियां होती है लेकिन रानी सिर्फ एक।

कामदार मधुमक्खी से घिरी हुई रानी मधुमक्खी

रानी मधुमक्खी ओर कामदार मक्खीओ का जन्म समान प्रकार के अंडेमे से होता है लेकिन रानी मक्खी कामदार मक्खीसे बहुत बड़ी होती है। यह तफावत उन्हें विकास के दौरान मिलनेवाले विशेष आहार रॉयल जेली की विभिन्न मात्रा के कारण होता है।

रानी मधुमक्खी शहद ओर पराग नही खाती, उसके लिए विशेष आहार की व्यवस्था होती है जिसे रॉयल जेली कहते है। रॉयल जेली कामदार मक्खीओकी मस्तिस्क ग्रंथीमेसे निकलनेवाला स्त्राव है जो प्रोटीन से भरपूर होता है।

रानी मधुमक्खी अंडे मेसे बाहर आने के चार दिन बाद पहली बार हवामे उड़ती है ओर फेरोमोन नामक अंतःस्त्रावकी तीव्र गंध के कारण नर मधुमक्खियां उसके पीछे उड़ती है। उड़ते हुए हवामे ही समागम होता है। समागम के बाद नरकी मृत्यु हो जाती है। एक ही दिन मे मक्खी कही सारे नरो के साथ समागम करती है जब तक उसका गर्भाशय विर्यसे सम्पूर्ण भर ना जाये। उसके बाद रानी मक्खी को कभी मैथुन की आवश्यकता नही रहती। बादमे जीवनपर्यन्त रानी अपनी जरूरत के अनुसार अंडे दे सकती है।

रानी मधुमक्खी अनुकूल ओर प्रतिकूल वातावरण के मुताबिक अपनी इच्छानुसार अंडे कम या ज्यादा दे सकती है। रानी मक्खी नर अंडा देना है या मादा अंडा देना है ये समय ओर जरूरियात के मुताबिक निश्चित करती है।

रानी मधुमक्खी की आयु 3 साल होती है ओर कामदार की महज 3 माह। इसका कारण भी उसे मिलने वाला विशेष आहार ही है।

रानी मधुमक्खी अपनी पूरी आयु मे सिर्फ एक ही बार समागम करती है ओर बाद मे जीवनभर अंडे दे सकती है।

रानी मधुमक्खी फलित अंडे दे सकती लेकिन कामदार नही।

छत्ते मे सिर्फ 200 से 300 नर मक्खीया होती है बाकी हजारो की संख्यामे अल्पविकसित मादाए ( कामदार मक्खी ) होती है जो कभी समागम नही कर सकती ओर एक पूर्ण विकसित मादा होती है जो रानी है।

रानी मधुमक्खी फूलो की ऋतुमे रोज मे 1500 से 2000 अंडे भी दे सकती है । उन्हें खिलाने पिलाने का काम कामदार मक्खियां करती है।

रानी मधुमक्खी अपना पूरा जीवन शाही रुतबे के साथ व्यतीत करती है लेकिन जब रानी वृद्ध हो जाती है ओर अंडे देने की क्षमता पूरी हो जाती है तो उनकी ही संताने ( कामदार मक्खी ) उसे मार डालती है ओर नई रानी बना लेती है।