आयुर्वेद की द्रष्टि से शहद के फायदे

आयुर्वेद के आधार पर शहद के लाभ

अयुर्वेद्के आध्यग्रंथ सुश्रुतसंहितामें शहद के लाभों का विवरण मिलता हे।

सुश्रुतसंहितामें शहद के लाभों का विवरण सूत्रस्थान ४६ द्रव्यविधीधर्याय के श्लोक १३२ में हे।

"अग्निदिपन :":

अधिकांश रोगों का कारण खराब पाचन शक्ति है। शहद का उपयोग जठराग्नि को तेज करता है।

"वणर्य, सुकुमार, प्रसादन":

शहद को आंतरिक और बाह्य रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। शहदको त्वचा पर लगाने से त्वचा कोमल और सुंदर दिखाती हें। आधुनिक संसाधनों के अनुसार, सुंदरता बढ़ाने के लिए शहद का भी उपयोग किया जाता है। अगर यह चेहरे पर नियमित रूप से लगाया जाये, तो त्वचा चमकदार और नरम होती है। यहां तक ​​कि शहद इस्तेमाल धूपसे बचने के लिएभी किया जा शकता हें। शहद में ऐसे गुण हैं जो त्वचा को अल्ट्रावायोलेट किरणों से बचाते हैं और त्वचा को ताज़ा रखती हैं। शहद त्वचामें से पानी की मात्रा को कम नहीं होने देता है और इसलिए त्वचाकी चमक कम नहीं होती है। यदि त्वचा तेलयुक्त है, तो शहद और दूध के साथ मिलाकर त्वचा पर लगाना चाहिए। अधिकांश कॉस्मेटिक कंपनियां अपने उत्पादों में शहद का उपयोग करती हैं। शहद एक प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट है, जो चेहरेको छोटे मोटे इन्फेक्सन से बचाता। पिम्पल्सको रोकने के लिए शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है।

"स्वर्य":

शहद का नियमित उपयोग से आवाज की गुणवत्ता में सुधार होता है।

"वाजीकरण":

शहद का उपयोग से वीर्य की मात्रा में बढ़ती है और वीर्य की गुणवतामें सुधार होता है। यूनानी हकीम हजारों वर्षो से शहद का उपयोग कामवर्धक दर्व्य के रूप में करते आ रहे है। यूनानी हाकिमोने लिखा हे की शहद का नियमित उपयोग पुरषों के शुक्राणुकी वृद्धि करता है और २ चम्मच शहद का नियमित सेवन नपूंशको में भी शारीरिक संभोग की इच्छा पैदा कर देता है।

"लेखन":

शहद में लेखन का गुण होने के वजह से वह शरीर में जमा चरबी और कफ़ को बहार निकाल ने में मदद रूप होता हे। शहद मोटापा दूर करने के लिए एवम शरीर को सुडोल बनाने के लिए उत्तम औषध हे। आधुनिक समय में भी शहद का उपयोग मोटापा दूर करने के लिए किया जाता है। शहद बिना किसी दुष्प्रभाव के शरीर की अतिरिक्त चरबी को हटा देता है। खाँसी समस्या विशेष रूप से वृद्ध लोकोमें अधिक होती है। मधू अस्थमा, जुकाम और खांसी जैसी बीमारियों के लिए उत्तम उपचार है।

"हृदय ":

मधुके नियमित उपयोगसे हृदय स्वस्थ् रहेता है और हदयकी मांसपेशियों की दक्षता बढ़ जाती है। प्रसिद्ध डेनिश मेडिकल जर्नल में, डॉ। एंड्रॉव और डॉ। एरिक वोग्लमैन ने एक प्रयोग प्रस्तुत किया था जो निम्नानुसार है। २ चम्मच शहद और ३ चम्मच दालचीनी का पावडर ,ठंडे चाय के पानी में मिलाकर दर्दी को दिया गया। नियमित रूप से इस प्रकार की चाय पीने से जमा होने वाले कोलेस्ट्रॉल और चरबी की मात्रा पूरी तरह से नियंत्रित होती है। इस तरह, जो नियमित रूप से शहद का उपयोग करता है वह हृदय रोग बचता है। ( विकी वीकली न्यूज कनाडा, १७ जनवरी १९९५ से)

"संधान":

मधूमें संधान का गुण होनी की वजह से वह हड्डियोंको जोड़ने का कम करता है। आधुनिक संसाधनों के अनुसार, शहद में विपुल मात्रा में मिनरल होते है, यह हड्डियों के लिए फायदेमंद है।

"शोधन, रोपण ":

घाव में शहद का उपयोग संक्रमण से बचाता है और जल्दी ही धाव को भर देता है। शहद मधुमेह के अल्सर में भी उपयोगी है।

"सूक्ष्ममर्गानुसारी":

मधू में सूक्ष्म मार्ग अनुसारी का गुण होनी की वजह से शरीर की छोटी से छोटी केशिका तक पहोचने में सक्षम है। इसीलिए शहद शरीर के हर हिस्से के लिए फायदेमंद है।

"चक्षुषय":

आंखो में शहद का नियमित उपयोग दृष्टि को बढ़ता है। शहद की 1 या 2 बूंदों को दिन में २ से 3 बार आंखो में लगाया जा सकता है। आप इंडीजिनश हनी पर भरोसा कर सकते हैं (ध्यान दें: आंख में शहद लगाने से जलन होती है।)