मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षिण

इंडिजिनस हनी में मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षिण

यदि आप मुधुमक्खी पालन में प्रशिक्षिण की तलास कर रहे है, तो आप सही जगह पर है। हम आपको मधू/शहद और मधुमक्खीके बारे में सही जानकारी प्रदान करेंगे। आज का यह आर्टिकल मधुमक्खी पालन में प्रशिक्षिण के विषय में है।

मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षिण की आवश्यकता क्यों है?

क्योकि आप ऐसे जीव के साथ काम करना चाहते हो जिसके ऊपर मनुष्यों के बाद सबसे ज्यादा साहित्य मिलेगा। मधुमक्खी कोई सामान्य जीव नहीं हे परन्तु वह असामान्य से भी ऊपर है। यदि आप मधुमक्खी को शांति से देखेंगे तो आपको वह आपको प्रकृति द्वारा निर्मित सबसे सुंदर जीव लगेगी। उत्क्रांति के दोरान मधुमक्खीके शरीर रचनामें कुछ ऐसे बदलाव हुए है की वह एक जादू सा लगता है।

मधुमक्खी का पूरा जीवन फूलो पर निर्भर करता है। मधुमक्खी के भोजनका एक मात्र स्त्रोत फुल है। मधूमक्खी के सिर से लेकर पाव तक प्रत्येक अंग उसके जीवन के अस्तित्त्व के लिए एक सही उपकरण की तरह काम करते है। वास्तव में वनस्पति का और मनुष्योंका जीवन मधुमक्खी के परागण के कार्य पर निर्भर करता है। प्रतिभाशाली वैज्ञानिक आल्बर्ट आइंस्टाइन कहते थे के "अगर पृथ्वी से मधुमक्खी का नाश हो जाये तो सिर्फ चार साल मे ही सारी जीवसृस्टि खत्म हो जायेगी। "

यदि आप एक सफल मधुमक्खी पालक होना चाहते है, तो आपको मधुमक्खीका व्यवहार, मधुमक्खिकी शारीरिक रचना एवम मधुमक्खी को अनुकूलित फूलो का सामान्य ज्ञान होना आवश्यक है।

यहा पर में एक बात बताना चाहता हु के अगर आप मधुमक्खी पालन का काम एक व्यव्साय के रूप में करना चाहते हो तो कोई एक जगह पर स्थिर हो करना संभव नहीं है, क्युकी एक स्थान पर आपको पुरे साल फुल मिलते रहे यह संभव नहीं है। इसलिए यदि वास्तव में मधुमक्खी पालन से उचित वितीय उत्पादन चाहते है, तो आपको सीज़न के अनुसार मधुमक्खिके बक्सों\स्थानांतरित करना होगा।

गुजरात में मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में पांच साल के अनुभव के अनुसार, मुझे पता चला की गुजरात में कई प्रकारकी मधुमक्खी के अनुकूलित फसलो की खेती की जाती है जैसी की धनिया, सौंफ, तिल, अजवाईन, अरहर, सरसों, मुंग, काले मुंग, कपास, बाजरा, सूर्यमुखी आदि की खेती की जाती है। नारयेल, बेरी, ड्रम स्टिक, निम्बू, आम और निलगिरी जैसे बागवानी पाक की खेती होती है। गुजरात के जंगल विस्तार में बबूल भी ज्यादा मात्रा में पाए जाते है।

फसलो और पौधों की यह विशाल जैवविविधता गुजरात में मधुमक्खी पालनमें सफलता को प्रभावित करती है। इसीलिए गुजरात में मधुमक्खी पालन का कार्य ज्यादा मुश्किल नहीं लगता। हमने २०१२ में मधुमक्खी पालन का कार्य चालू किया था। आज हमारे पास ५०० से अधिक मधुमक्खी के बक्से है। हमारे प्रशिक्षित कर्मचारी मधुमक्खी पालन का कार्य राष्ट्रिय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा निर्मित गाइडलाइन के अनुसार करते है।

हमारे यहा प्रशिक्षण में निचे दिये गए विषय शामिल है।:

बक्से के अन्दर मधुमक्खी का जीवन:हमारे प्रशिक्षित कर्मचारी आपको मधुमक्खिका जीवन चक्र, मधुमखियो का वर्ताव एवम उनके सोशियल वर्ताव को समजने आपकी मदद करेंगे।

मधुमक्खि का प्रबंधन: मधुमक्खी पालन में उपयोगी साधन सामग्री का विवरण इस विषय में सामिल है।

मधुमक्खीका आहार: यदि आप मधुमक्खी से ज्यादा शहद प्राप्त करना चाहते हो तो आपको मधुमक्खी के आहार के विषयमें जानकारी होना आवश्यक है।

एपिअरी का प्रबंधन: मधुमक्खी के बक्से जहा पर रखते है उस जगहको एपिअरी कहते है। एपिअरी के लिए पसंद की हुई जगहका मधुमक्खी विकास एवम शहद ऊत्पादन पर प्रभाव पड़ता है।

मधुमक्खी के बक्सोंका स्थानांतरण: यह मधुमक्खिपालन का सबसे कठीन कार्य है। इस कार्य के लिए उचित प्रशिक्षणकी आवश्यकता है।

शहद और मधुमक्खी के अन्य उत्पादों की बिक्री: हमारे सेल्स विशेषज्ञ आपको मधू और मधुमक्खी उत्पदोकी बिक्रीमें मदद करेंगे।

मधुमक्खी की परागण कार्य से आर्थिक लाभ: मधुमक्खी के परागण के कार्य से आय में बढ़ोतरी हो सकती है।

मधुमक्खीपालन से जुडी समस्या का निवारण: मधुमक्खीको होने वाली बिमारिया एवम अन्य समस्या को हल करनेमें हमारे प्रशिक्षित कर्मचारी आपकी मदद करेंगे।